सीतापुर में बाढ़ के पानी में डूबने से एक ही परिवार के तीन की मौत, बिहार में गंडक का तटबंध टूटा
5 अक्टूबर 2026 · लेखक: Gaurav kumar

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बाढ़ के पानी में डूबकर पिता, बेटे और भतीजे की मौत हो गई। यूपी के 11 जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि बिहार में गंडक का तटबंध टूटने से छह जिलों में लाखों लोग प्रभावित हैं।
सीतापुर में खेत देखकर लौट रहे थे, नाले के पास हुआ हादसा
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में बाढ़ का पानी एक परिवार के लिए काल बन गया। रामपुर मथुरा क्षेत्र के सरैया मसूदपुर गांव के सुरेंद्र चौहान (40) शनिवार को अपने बेटे सौरभ और भतीजे शोभित के साथ बाढ़ से प्रभावित खेत देखने गए थे। लौटते समय सरैया मसूदपुर से चंदेला जाने वाले संपर्क मार्ग की पुलिया के पास सौरभ का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। बेटे को डूबता देख सुरेंद्र उसे बचाने के लिए पानी में उतरे और दोनों को डूबता देख शोभित भी बचाने के प्रयास में कूद पड़ा। देखते ही देखते तीनों बाढ़ के पानी में डूब गए। सौरभ और शोभित, दोनों नाबालिग थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जगह चौका नदी से निकले नाले की थी, जहां बहाव बहुत तेज था।
तलाश, पोस्टमॉर्टम और मुख्यमंत्री के निर्देश
सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू की। पुलिस भी मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव बाहर निकाले गए, जिन्हें पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। घटना की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने, एसडीआरएफ की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाने और पीड़ित परिजनों से मिलकर हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए। गांव में शोक का माहौल है।
बारिश थमी, पर यूपी में नदियां अब भी उफान पर
उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर थम गया है, लेकिन बांधों और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण 11 जिलों में 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ, लखीमपुर खीरी और उन्नाव में असर ज्यादा बताया जा रहा है। लखनऊ में गोमती का जलस्तर बढ़ने से 40 हजार से ज्यादा घर प्रभावित बताए जा रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में बाढ़ का दायरा कहीं बड़ा था। तब 26 जिलों में करीब 3.53 लाख लोग प्रभावित बताए गए थे। यानी हालात कुछ सुधरे हैं, पर संकट खत्म नहीं हुआ है।
गोंडा में जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने बताया कि घाघरा और सरयू दोनों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। करनैलगंज और तरबगंज तहसील के गांवों की करीब 7 हजार की आबादी प्रभावित है और राहत-बचाव में टीमें लगाई गई हैं। पूर्वांचल में भी स्थिति गंभीर है। गोरखपुर में सरयू और राप्ती के उफान से 57 गांव प्रभावित हैं, जिनमें गोला तहसील के 42, सदर के 8 और बांसगांव के 7 गांव शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन ने अब तक 17,192 राशन किट और 49,080 लंच पैकेट बांटे हैं, और राहत कार्य के लिए 93 नाव और 15 मोटरबोट तैनात हैं।
बिहार में गंडक का तटबंध टूटा
बिहार में हालात और गंभीर हैं। नेपाल और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के बाद उफनती गंडक का तटबंध सारण जिले के पनापुर और मकेर प्रखंडों में टूट गया। 2 अक्टूबर को पानी सारण के नए इलाकों में फैल गया। छह जिले बाढ़ की चपेट में हैं। 2 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक 3.65 लाख लोग प्रभावित थे और करीब 44 हजार लोगों को घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। ताजा रिपोर्ट्स में करीब 4 लाख लोग प्रभावित और 255 गांव पानी में बताए गए हैं, यानी संख्या बढ़ी है। सारण सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 170 से ज्यादा गांव पानी से घिरे बताए गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक तेज पानी में डूबने से तीन युवकों की मौत हुई है और मकेर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पांच लोगों के लापता होने की सूचना है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से 3,000 से ज्यादा राशन पैकेट गिराए जा चुके हैं और शाम तक 5,000 से ज्यादा और पहुंचाने की उम्मीद थी। सारण में एनडीआरएफ की 12 और एसडीआरएफ की 7 टीमें तैनात हैं, और दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त टीमें भेजी गई हैं। सितंबर में भी बिहार इसी संकट से गुजरा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक तब 14 जिलों के लगभग 44 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे। यानी बिहार में यह दूसरी बड़ी लहर है।
सीतापुर की घटना बताती है कि बाढ़ का पानी बाहर से शांत दिखने पर भी जानलेवा हो सकता है। बहाव और गहराई का अंदाजा नहीं लगता, और जलमग्न रास्तों, पुलियों और खेतों की तरफ जाना जोखिम भरा होता है। फसल बचाने की चिंता में लोग अक्सर यह जोखिम उठा लेते हैं। आने वाले दिनों में असली परीक्षा यह होगी कि नदियों का पानी कब उतरता है, तटबंधों की मरम्मत कितनी जल्दी होती है, और पानी उतरने के बाद फसल और मकानों के नुकसान का आकलन तथा राहत राशि का वितरण कितनी तेजी से होता है।
(तस्वीर: प्रतीकात्मक, यह घटनास्थल की तस्वीर नहीं है। तस्वीर स्रोत: Pixabay। खबर के स्रोत: अमर उजाला, ईटीवी भारत, प्रभात खबर, पीटीआई-भाषा)
